नीतीश के 'शांतिदूत' भी नहीं बुझा पाए आग! अनंत सिंह और नीरज कुमार की सियासी अदावत में नया ट्विस्ट

बिहार MLC चुनाव से पहले JDU के दो बड़े चेहरे आमने-सामने हैं। अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ क्यों खोला मोर्चा और क्या इस अंदरूनी कलह को संभाल पाएंगे नीतीश कुमार? पढ़िए पूरी इनसाइड स्टोरी।
नीतीश के 'शांतिदूत' भी नहीं बुझा पाए आग! अनंत सिंह और नीरज कुमार की सियासी अदावत में नया ट्विस्ट
बिहार की राजनीति में जब दो बड़े रसूखदार आपस में टकराते हैं, तो उसकी गूंज सिर्फ पटना तक नहीं, बल्कि दिल्ली के गलियारों तक सुनाई देती है। इन दिनों जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अंदर एक ऐसी ही अंदरूनी जंग सुलग रही है, जिसने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी टेंशन बढ़ा दी है। यह लड़ाई है मोकामा के पूर्व विधायक और बाहुबली अनंत सिंह उर्फ 'छोटे सरकार' और जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता सह MLC नीरज कुमार के बीच।
ऊपरी तौर पर भले ही जेडीयू के सीनियर नेताओं ने इस मामले पर 'ऑल इज वेल' का पर्दा डालने की कोशिश की हो, लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ और ही बयां कर रही है। आइए समझते हैं कि आखिर इस हाई-प्रोफाइल विवाद की असली इनसाइड स्टोरी क्या है।
20 करोड़ का चैलेंज और एक 'सीक्रेट' मुलाकात
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब आगामी पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (MLC चुनाव) को लेकर सरगर्मी बढ़ी। नीरज कुमार का टिकट तय माना जा रहा था, लेकिन अचानक अनंत सिंह ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बात सिर्फ विरोध तक नहीं रुकी, अनंत सिंह ने कैमरे के सामने आकर नीरज कुमार को हराने के लिए 20 करोड़ रुपये तक की बाजी लगाने का खुला चैलेंज दे डाला।
इतना ही नहीं, अनंत सिंह ने जेडीयू उम्मीदवार के बजाय जन सुराज समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के पक्ष में खुलकर माहौल बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने साफ कहा, "मैं आज तक कोई चुनाव नहीं हारा हूँ, और इस बार अनुज सिंह 500% चुनाव जीतेंगे।"
पुरानी टीस या चुनावी गणित: आखिर क्यों खफा हैं अनंत सिंह?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अनंत सिंह और नीरज कुमार की यह लड़ाई राजनीतिक से ज्यादा व्यक्तिगत है। अनंत सिंह के करीबियों की मानें तो उनके दिल में दो बड़ी बातें खटक रही हैं:
• AK-47 केस का पुराना हिसाब: अनंत सिंह का सीधा आरोप है कि उनके पुश्तैनी घर से AK-47 राइफल की बरामदगी और उसके बाद उन्हें जेल भेजने की जो पटकथा लिखी गई थी, उसके पीछे नीरज कुमार का ही दिमाग था।
• मोकामा चुनाव में भितरघात: अनंत सिंह का दावा है कि पिछले विधानसभा चुनाव में जब उनका परिवार मोकामा से मैदान में था, तब नीरज कुमार ने पर्दे के पीछे से उनके खिलाफ काम किया था।
ललन सिंह की एंट्री और 'नो कमेंट' का फॉर्मूला
जब पानी सिर से ऊपर बहने लगा, तो जेडीयू आलाकमान ने अपने सबसे भरोसेमंद 'संकटमोचक' और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को मैदान में उतारा। ललन सिंह खुद अनंत सिंह से मिलने पहुंचे ताकि इस डैमेज को कंट्रोल किया जा सके।
इस सीक्रेट मीटिंग के बाद जो फॉर्मूला निकलकर सामने आया है, वो बड़ा दिलचस्प है:
1. जुबान पर लगाम: अनंत सिंह अब नीरज कुमार के खिलाफ कोई भी तीखा या सार्वजनिक बयान नहीं देंगे।
2. प्रचार से दूरी: ललन सिंह ने साफ किया कि अनंत सिंह नीरज कुमार के खिलाफ बोलेंगे तो नहीं, लेकिन वे उनके लिए वोट मांगने या चुनाव प्रचार करने भी नहीं जाएंगे।
जेडीयू के लिए आगे की राह कितनी मुश्किल?
कहते हैं कि राजनीति में लगी आग इतनी जल्दी ठंडी नहीं होती। भले ही पार्टी नेतृत्व ने अनंत सिंह को शांत रहने के लिए मना लिया हो, लेकिन अंदरूनी नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। नीरज कुमार के लिए चुनौती इसलिए बड़ी है क्योंकि अनंत सिंह का कोर वोटर अगर छिटका, तो पटना स्नातक सीट का मुकाबला बेहद त्रिकोणीय और दिलचस्प हो जाएगा।





