वृंदावन के प्रेमानंद जी महाराज विवाद का सच: क्यों उड़ रही हैं अफवाहें और क्या है इन आरोपों की असलियत?

वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज और उनके राधा केली कुंज आश्रम को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के विवाद और अफवाहें उड़ रही हैं। साधक की मौत से लेकर बच्चों के लापता होने और विराट कोहली से जुड़े दावों की असली हकीकत क्या है? जानिए पुलिस जांच और ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर हर आरोप का पूरा सच।
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर वृंदावन के मशहूर संत प्रेमानंद जी महाराज और उनके राधा केली कुंज आश्रम को लेकर कई तरह की बातें चल रही हैं। कुछ लोग इसे 'विवाद' कह रहे हैं, तो कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स पर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। जब इंटरनेट पर इस तरह की खबरें चलती हैं, तो आम भक्तों और पाठकों के मन में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पूरा मामला क्या है?
आज हम आपको बिना किसी मिर्च-मसाले के, सीधे तथ्यों के साथ बताएंगे कि आश्रम पर क्या आरोप लगे और पुलिस प्रशासन की जांच में उनकी क्या सच्चाई सामने आई।
1. आरोप: "आश्रम से बच्चे और सेवादार गायब हो रहे हैं"
सोशल मीडिया का दावा:
सबसे ज्यादा चर्चा हाथरस के रहने वाले 17 साल के लड़के अनुज चौधरी की हुई। अनुज के घरवालों ने आरोप लगाया कि उनका बेटा आश्रम से दीक्षा लेने के बाद लापता हो गया और उन्होंने आश्रम के बाहर थोड़ा हंगामा भी किया। इसके बाद अफवाह उड़ गई कि आश्रम से बच्चे गायब हो रहे हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट और सच:
यह आरोप पूरी तरह गलत साबित हुआ। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाई और लापता बताए जा रहे अनुज चौधरी को बरसाना के लाडली दास आश्रम से बिल्कुल सही-सलामत ढूंढ निकाला। असल में अनुज बिना किसी को बताए वैराग्य के भाव में संत के कपड़े पहनकर वहां रह रहा था। लड़के ने खुद बयान दिया कि उसे किसी ने बंधक नहीं बनाया था। यानी इस गुमशुदगी से प्रेमानंद जी के आश्रम का कोई लेना-देना नहीं था।
2. आरोप: "साधक रसिक दुलारी शरण की मौत के पीछे कोई साजिश है"
सोशल मीडिया का दावा:
आश्रम के एक 25 साल के सेवादार दीपक लोधी (जिन्हें दीक्षा के बाद रसिक दुलारी शरण नाम मिला था) की आश्रम की बिल्डिंग से गिरकर मौत हो गई। इंटरनेट पर कुछ लोगों ने इसे अंदरूनी लड़ाई या साजिश का रूप देने की कोशिश की।
ग्राउंड रिपोर्ट और सच:
घटना के तुरंत बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच की और आश्रम के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले। सीसीटीवी में साफ दिखा कि रसिक दुलारी शरण जी खुद अपने कमरे से बाहर आए, चौथी मंजिल की छत पर गए और वहां से उन्होंने नीचे छलांग लगा दी। यह पूरी तरह से एक दुखद आत्महत्या का मामला था। वृंदावन के दूसरे बड़े संतों (जैसे अनिरुद्धाचार्य जी) ने भी इस पर कहा कि किसी की निजी मानसिक स्थिति या डिप्रेशन के कारण उठाए गए कदम के लिए पूरे आश्रम या महाराज जी को जिम्मेदार ठहराना बिल्कुल गलत है।
3. आरोप: "विराट कोहली और बड़ी हस्तियों को 5 करोड़ देकर बुलाया गया"
सोशल मीडिया का दावा:
एक स्थानीय संगठन के पदाधिकारी ने पत्र लिखकर दावा कर दिया कि महाराज जी की पब्लिसिटी बढ़ाने के लिए क्रिकेटर विराट कोहली और अनुषा शर्मा को 5 करोड़ रुपये देकर आश्रम बुलाया गया था। इसके साथ ही कुछ जमीन के विवादों के नाम भी उछाले गए।
ग्राउंड रिपोर्ट और सच:
यह दावा सुनने में ही अजीब लगता है। जो लोग प्रेमानंद जी महाराज को सालों से जानते हैं, उन्हें पता है कि महाराज जी 'आकाशवृत्ति' पर रहते हैं—यानी वो न तो किसी से दान मांगते हैं और न ही आश्रम में कोई वीआईपी पास या पैसों से दर्शन की व्यवस्था है। विराट कोहली, अनुष्का शर्मा या देश के राष्ट्रपति जैसी बड़ी हस्तियां महाराज जी के विचारों और उनकी सादगी से प्रभावित होकर खुद वहां आशीर्वाद लेने आती हैं। पैसे देकर बुलाने की बात में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है।
4. आरोप: "विवादों से तंग आकर महाराज जी ने आश्रम छोड़ दिया"
सोशल मीडिया का दावा:
यूट्यूब और फेसबुक पर कुछ वीडियो में यह कहा जाने लगा कि इन सब बातों से परेशान होकर प्रेमानंद जी महाराज ने अपना केली कुंज आश्रम छोड़ दिया है और वो 20 किलोमीटर दूर किसी दूसरे इलाके में चले गए हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट और सच:
यह खबर भी पूरी तरह अफवाह निकली। आश्रम की तरफ से साफ किया गया कि महाराज जी ने आश्रम नहीं छोड़ा है। असल बात यह है कि महाराज जी पिछले कई सालों से किडनी की गंभीर बीमारी (पॉलीसिस्टिक किडनी) से जूझ रहे हैं और उनका रेगुलर डायलिसिस होता है। स्वास्थ्य कारणों से और रात के समय सड़क पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को मैनेज करने के लिए उन्होंने अपनी रात की पदयात्रा को कुछ समय के लिए रोका है। वे अब भी अपने आश्रम में ही हैं और वहीं से भक्तों को दर्शन दे रहे हैं।
5. आरोप: "फ्लैट में आग लगना और सेवादारों का झगड़ा"
सोशल मीडिया का दावा:
मथुरा में महाराज जी के एक पुराने फ्लैट में आग लग गई, जिसके बाद सोशल मीडिया पर कहा गया कि सेवादारों ने वहां कवरेज करने गए लोगों के साथ बदतमीजी की।
ग्राउंड रिपोर्ट और सच:
आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट था। चूंकि महाराज जी पिछले काफी समय से उस फ्लैट में नहीं रह रहे थे, इसलिए कोई नुकसान नहीं हुआ। हादसे के वक्त जो अफरा-तफरी मची, उसमें थोड़ी-बहुत बहसबाजी को बड़ा मुद्दा बनाकर पेश कर दिया गया, जबकि वह सिर्फ एक आम दुर्घटना थी।
हमारी राय (Editorial Note)
इंटरनेट के इस दौर में किसी भी बड़ी शख्सियत या संस्था के नाम पर फेक न्यूज फैलाकर व्यूज बटोरना बहुत आसान हो गया है। प्रेमानंद जी महाराज के मामले में भी यही हुआ। पुलिस की जांच और जमीनी हकीकत बताती है कि आश्रम के खिलाफ सोशल मीडिया पर चलाए गए सारे नैरेटिव बिना किसी सबूत के थे। हमारी पाठकों से यही अपील है कि किसी भी वायरल वीडियो या पोस्ट पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।





